शुक्रवार, 16 जून 2017

संस्कारहीन

संस्कारहीन

' देखिए जी, लेन देन पर हम थोड़ा बात कर लें, फिर बात पक्की ही समझें| आपकी बेटी बहुत संस्कारी है और हमें ऐसी ही लड़की की जरूरत है,' लड़के के पिता ने रोब लेते हुए कहा|

'जी, आप जैसा कहैं हम अपनी हैसियत के अनुसार देने के लिए तैयार हैं,' मद्धिम आवाज थी लड़की के पिता की|

'समान तो जो आप अपनी लड़की को गृहस्थी जमाने के लिए देंगे वो तो देंगे ही| हमें कैश के रूप में दस लाख दे दें, बस| बारातियों का स्वागत तो आप अच्छे से करेंगे ही| हमारा घर भी बहुत संस्कारी है, बिटिया को कोई तकलीफ न होगी' लड़के के पिता की आवाज थी|

'अंकल' अचानक लड़की बोल पड़ी, 'आप जो दस लाख लेंगे उसमें से मेरे लिएआठ लाख के जेवर तो बनवाएँगे ही जो संस्कारी घर में चलता है|'

'संस्कारहीन लड़की, लेन देन की बात करती है' लड़के के पिता भड़क गए|

'अब मैं क्या बोलूँ संस्कारहीनता पर...'लड़की ने मुस्कुराकर कहा और कमरे से बाहर निकल गई|

--ऋता


5 टिप्‍पणियां:

  1. लड़की ने सटीक जवाब दिया। ऐसी ही बहादुर लड़कियों की जरूरत है हमारे समाज को। सुन्दर लघु कथा।

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 18 जून 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. वाह बहादुर लड़की
    ऐसा ही हर लड़की को करना चाहिए
    शानदार पोस्ट

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  4. सभ्य -सुसंकृत समाज के बदनुमा दाग़ को बखूबी दिखा दिया है आपने। बधाई।

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